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अंतर्मन की तलाश

Antarman ki Talash   किस गम में अंतर्ध्यान है ? किस बात से हैरान है ? अंतर्मन तलाश रहा क्या ? खुद ही तू भगवान है। खोया क्या और पाया क्या है ? दूर गया क्या , आया क्या है ? ढलती जाए शाम का सूरज , धुप नहीं फिर छाया क्या है ? दिल पर बढ़ता बोझ ये कैसा ? किसने है रस्ते को रोका ? क्यों निर्विघ्न नहीं चलता है , खाया है किससे ये धोखा ? सागर में लहरें है जितनी , द्वन्द छिपा है मन में उतनी। इंसा - इंसा खुदा - खुदा है , सोच - सोच है अपनी - अपनी। बोते हो क्यों शूल चमन में ? क्या मिलता है क्रूर दमन में ? क्षणभंगुर संसार से चलके , मिलना है फिर दूर गगन में। ========================================================================= Please like, share, subscribe and comment

प्रवासी मजदूर - पैदल पदयात्रा