चलो फिरसे बनाये एक मिटटी का घरोंदा


Mitti Ka Gharonda
Mitti Ka Gharonda


चलो  फिरसे  बनाये  एक  मिटटी  का  घरोंदा 




चलो  फिरसे  बनाये  एक  मिटटी  का  घरोंदा
लगाए  चाँद  को  छत  पर , और  तारों  से  सजाये
कोई  रंग  भर  दो  जरा  दीवारों  पर  सतरंगी
आओ  विक्टर अब्दुल  सिमरन  और  बजरंगी 


घर  ही  मंदिर  हो  मस्जिद  हो , गिरजा  और  गुरुद्वारा  हो
एक  सी  चले  हवा ,  एक  सा  दिन  रात और  पखवारा  हो
धर्म  इंसानियत  हो  बच्चो  सा  मासूमियत  हो .
गुस्सा  हो , परेशानी   हो , झगड़े  हो , नादानियाँ  हो
सुबह  तक नाराजगी  हो  पर  शाम  तक  भाईचारा  हो .


चलो  फिरसे  बनाये  एक  मिटटी  का  घरोंदा
लगाए  चाँद  को  छत  पर , और  तारों  से  सजाये
कोई  रंग  भर  दो  जरा  दीवारों  पर  सतरंगी
आओ  विक्टर , अब्दुल , सिमरन  और  बजरंगी 


आयतों में राम हो और छंदों में नाम नबी का हो
जीजस का गुरुद्वारा हो, पंगत एक सभी का हो
एक भारत हो, एक ताकत हो, दिशा एक अनुशाषित हो.
कदम एक सा उठे, चले हम एक लक्ष्य प्रकाशित हो.



चलो  फिरसे  बनाये  एक  मिटटी  का  घरोंदा
लगाए  चाँद  को  छत  पर , और  तारों  से  सजाये
कोई  रंग  भर  दो  जरा  दीवारों  पर  सतरंगी
आओ  विक्टर अब्दुल  सिमरन  और  बजरंगी 


चलो  फिरसे  बनाये  एक  मिटटी  का  घरोंदा 


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