शाम के बाद धुआं सा उठता है

शाम के बाद धुआं सा उठता है


शाम के बाद धुआं सा उठता है
शाम के बाद धुआं सा उठता है



शाम के बाद धुआं सा उठता है
ये किसी चिराग की लौ है या दिल कहीं सुलगता है?
शाम के बाद धुआं सा उठता है


कौन है मेरी तरह वक़्त का मारा ग़मगीन
तन्हाई मेरे घर का और कहाँ टहलता है?
शाम के बाद धुआं सा उठता है


हाल पूछता अब नहीं कोई ना दुआ सलाम है
तेज रफ़्तार के शहर में कहाँ कोई ठहरता है?
शाम के बाद धुआं सा उठता है


बेअसर अब भी नहीं मेरी पुकार सुन के देख
पथ्थर का दिल भी लेकिन क्या कभी पिघलता है?
शाम के बाद धुआं सा उठता है


रंग लाती है दुआ दिल से निकलकर मुझे इंकार नहीं
प्यासी मरुभूमि में मगर बादल कहाँ बरसता है?
शाम के बाद धुआं सा उठता है


मौसम मेरे घर पे है मेहरबान इस कदर
गुलमोहर मेरे आंगन  का पत्तों को तरसता है
शाम के बाद धुआं सा उठता है


ये किसी चिराग की लौ है या दिल कहीं सुलगता है?
शाम के बाद धुआं सा उठता है


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