मृत्यु का रणघोष

मृत्यु का रणघोष

मृत्यु का रणघोष
मृत्यु का रणघोष


मारना छल छद्म से कोई जीत है क्या?

मृत्यु का रणघोष भी संगीत है क्या?

नींद के आगोश में निशब्द होकर,

उठ न पाए फिर कभी बिस्तर से सोकर ॥

जुर्म क्या है ये की वो मासूम है?

या की खाली हाथ न बन्दूक है?

मेहंदी के रंग लगे थे हाथ में,

तुम लिए फिरते  लहू क्यों साथ में?

रास्ते विपरीत चलकर क्या मिला?

क्या छिपा सन्देश आतंकवाद में?

अलग बैठे हुए क्यों मद से चूर होकर?

सृजन से अलग, मानवता से दूर होकर ।

तोड़ना किस धर्म का आधार है?

विश्वपटल पर ये कैसा नया व्यव्हार है?

आदमी ही आदमी की जान ले,

कौन सा ये खेल है जो सम्मान ले?

मनुज ही आज दुश्मन है मनुज का,

अनुज है रक्त का प्यासा अनुज का॥

मृत्यु का रणघोष

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