घोस्ट सॉन्ग

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घोस्ट सॉन्ग कविता इंतकाल के बाद के दर्द को बयां करती हुई अपने आप में अनूठा है। इस घोस्ट सॉन्ग में समाहित भावनाओं को अपने कमेंट में लिखें और मिलती जुलती कविता भी कमेंट बॉक्स में डालें। चुनी हुई कविताएं पुरस्कृत की जाएगी।


लाख मुद्दत के इंतजार के बाद।
तुम अब आये मेरे इंतकाल के बाद।।

शब्द ज़िंदा है मेरे, मेरी वादियों में अबतक।
नाम बस तेरा है, हर अल्फाज के बाद।।
लाख मुद्दत के इंतजार के बाद।
तुम अब आये मेरे इंतकाल के बाद।।

निगाह भर के जरा देख, दरो-दीवार का आलम।
क्या फिर सजेगी महफ़िल यहाँ शाम के बाद।।
लाख मुद्दत के इंतजार के बाद।
तुम अब आये मेरे इंतकाल के बाद।।

सुबह की धुप सुनहरी, यहाँ कैद अब भी है।
राह गुलजार सी है, तेरे आखिरी पैगाम के बाद।।
लाख मुद्दत के इंतजार के बाद।
तुम अब आये मेरे इंतकाल के बाद।।

मैं गर तनहा न था, तो कोई साथी भी नहीं।
कहीं बेनाम सा गुम था, तेरे नाम के बाद।।
लाख मुद्दत के इंतजार के बाद।
तुम अब आये मेरे इंतकाल के बाद।।

कफ़न की चादरों में लिपटी रही सदियों इस कदर।
जैसे कोई नींद में सोया हो, हर काम के बाद।।
लाख मुद्दत के इंतजार के बाद।
तुम अब आये मेरे इंतकाल के बाद।।

क्यों गिराते हो अश्क, मेरे मजार पर आकर?
क्या कोई लौट के आया है घर, शमशान के बाद?
लाख मुद्दत के इंतजार के बाद।

तुम अब आये मेरे इंतकाल के बाद।।

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