दिल के आगोश


दिल के आगोश

दिल के आगोश
दिल के आगोश


बात नजरों से हो बस, लब्ज खामोश रहे।
दरमियान हम हो, ना हो, बस दिल के आगोश रहे।।

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बंद आँखों से बरामद कर लो, तफ्तीश जब भी हो।
होठों पे मुस्कराहट चुन लो, टीस जब भी हो।।
सुबह के धुप सा सुहाना चेहरा।
बरबस हर बात पे लुभाता चेहरा।।
मीलों दूर हूँ, परछाई मगर साथ है।
बक्त बेवक़्त मुझको हसाता चेहरा।।
मनाओ जश्न की महफ़िल भी मदहोश रहे।
दरमियान हम हो, ना हो, बस दिल के आगोश रहे।।

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सताए कौन मुझे, मेरे हालात पे आज।
रुलाए कौन मुझे, मेरे जज्बात पे आज।।
अक्स भी दूर है, छोड़ के दामन मेरा।
बमुश्किल कैद से छूटा हूँ, दुनियां के सवालात से आज।।
इलज़ाम मेरे हिस्से आये, बस तू निर्दोष रहे।
दरमियान हम हो, ना हो, बस दिल के आगोश रहे।।


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